मेरी कलम मेरी आवाज

 #धर्मांतरण_पर_क्या_लिंखु_क्यों_लिखूं:-कश्मीर में सिख्ख बच्चियों के धर्मांतरण और उत्तरप्रदेश में धर्मांतरण कानून के हल्ले के बीच 02-03मित्र बोले इस विषय पर आपने विशेष कुछ लिखा नही क्या मन मे कोई विचार नही आया।उन्हें क्या बताता कि कितना मंथन किया,कलम को उठाकर वापस कितनी बार वापस रखा।मन मे विचार आया #क्या_धर्मांतरण_देश_मे_पहली_बार_हो_रहा_है,इतिहास उठा लीजिए और विशेष कर महिलाओं और बच्चियों के साथ क्या हुआ जानिए और मंथन कीजिए।यह कुकर्म वर्षो से चल रहा है,धन्य है सिख्ख गुरुवर,वीर शिवाजी,महाराणा प्रताप,राणा सांगा और वो तमाम वीर जिन्होंने अपना,अपने परिवार और बच्चों का बलिदान किया पर धर्मांतरण नही किया नही तो शायद हम भी 05 समय नमाज पढ़ रहे होते,#गो_माता_को_पूजने_का_हमें_सौभाग्य_नही_मिलता। जब आप सत्य का आईना दिखाने जाएंगे तो आप साम्प्रदायिक घोषित हो जाएंगे और आपके बीच के जयचंद सबसे पहले आपके सामने उनके साथ उनके आगे खड़े हो जाएंगे।वोट बैंक के आधार पर जाति धर्म का गुणा भाग भी होगा। हाँ खुद पर आएगी,वोट बैंक पर आएगी  तो रंग भी बदल लेंगे।दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष और अकाली दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता #मनजिंदर_सिंह_सिरसा अभी का ताजा उदाहरण है,कुछ दिन पूर्व हिदू समाज को नसीहत दे रहे थे सिख्ख बच्चियों का हल्ला मचा तो चुनावी फायदे में बोल बदल गए ।कल सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया  उतर प्रदेश नए धर्मांतरण कानून को लेकर अपनी दलीलें दे रहे थे,जब पहले से कानून है तो नया क्यों ला रहे है फिर जवाब भी नही दे पाते इधर उधर भटक जाते है,मुस्लिम नेता और धर्मगुरुओं को इन जयचन्दों का साथ मिल जाता है।कांग्रेस,सपा,आप,बसपा,एन.सी.पी आजकल कुछ कुछ शिवसेना भी सब एक साथ खड़े होकर ऐसा व्यवहार करते हैं कि यह सब कुछ संघ और भाजपा के कारण हो रहा है 2014 के पहले कुछ नही था सत्ता का लालच इन पर किस कदर हावी है कि ये अपनी आने वाली पीडिया के भविष्य को भी नही देख रहे हैं।08+01 राज्य भी इन्हें नही दिखते कश्मीर की सच्चाई इन्हें नही दिखती बस सत्ता दिखती है ये भूल जाते हैं कि इनकी पीढ़ियां भी नही बचेंगी।कश्मीर की घटना का समर्थन करने वाले इन नेताओं से पूछना चाहता हूं कि इनकी 18-22 साल की बच्ची का विवाह किसी अधेड़ पूर्व से शादीशुदा से कर देंगे और मुस्लिम से भी कर देंगे उसे दिल से सौंप देंगे अरे बेशर्मो कम से कम निंदा तो कर दो।इतना ही कह दो कि जबरन या लालच में हो रहा है तो गलत है पर नही कहेंगे क्योंकि उनको सत्ता चाहिए और उसके लिए कैसे कैसे खेल हो रहे हैं सिख्खो और हमारे बीच खाई खोदने कि कोशिश हो रही है,दलित और मुस्लिम का गठजोड़ करने कि कोशिश हो रही है ।हम देख रहे हैं पर आंख बंद कर लेते है मुंह पर पट्टी चिपका लेते है,आने वाला भारत भी हमे दिख रहा है पर कभी जातिवाद,कभी क्षेत्रवाद ओर वर्णवाद हमारे दिमाग पर पहले कब्जा करता है,लोग जानने समझने पर भी बाहर नही निकलना  चाहते,पड़ोसी के घर हल्ला हो तो मतलब भी,मेरे घर हो तो पड़ोसी और पूरा मोहल्ला आ जाना चाहिए।अब ऐसे में किसे जगाएंगे, अब गरजिम्मेदारो के लिए क्या लिंखु,क्यों लिंखु धर्मांतरण पर हाँ यह तय है आज उसकी बच्ची,कल पड़ोसी कि और परसो मेरी?टी वी डिबेट में जितन प्रवक्ता आते है उनकी और उनके नेताओं की भी बच्चियां है वो यही ध्यान रखें बस।जय सियाराम।

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